कवयित्री (#Poet) - Kaveri Dafal (कावेरी डफळ)
Wednesday, 28 July 2021
Sunday, 18 July 2021
समुद्र बिलोरी ऐना
समुद्र बिलोरी ऐना
सृष्टीला पाचवा महिना
वाकले माडांचे माथे
चांदणे पाण्यात न्हाते
आकाशदिवे लावित आली कार्तिक नवमीची रैना
समुद्र बिलोरी ऐना…
कटीस अंजिरी नेसू
गालात मिश्कील हासू
मयुरपंखी मधुरडंखी उडाली गोरटी मैना
समुद्र बिलोरी ऐना…
लावण्य जातसे ऊतू
वायाच चालला ऋतू
अशाच वेळी गेलिस का तू करुन जीवाची दैना
समुद्र बिलोरी ऐना…
कवी - बा. भ. बोरकर
Friday, 16 July 2021
Alone Again
Completely surrounded
A constant din
Inside, feeling alone again
I can never go home again
Destined to carry another's sin
The emptiness echoed
Day after day
Pure pain I thought
Would never go away
Across the decades you thought of me
You longed for connection to set you free
My path crossed yours
Stars crossed and soared
Scars opened, revealing our damaged cores
A meeting of spirit, a meeting of minds
Never knowing a friendship so pure and so kind
Sudden understanding with no warning or sign
No longer alone, I'm yours and you're mine
- Sarah Hernandez
Tuesday, 13 July 2021
तेरे साथ भी, तेरे बाद भी
तेरे साथ भी, तेरे बाद भी,
दिन होंगे , रातें भी होगी,
दीप जलेंगे, अंधेरा भी छटेगा,
सन्नाटा होगा, हवाएं भी बहेगी,
और झकझोरेगी हर शाखा तरू की,
समुंदर की लहरें भले डराएगी,
पर कश्ती फिर भी चलेगी,
हां बिन मंजिल, बिन साहिल बहेगी,
सिर्फ बहते रहेगी।
तेरा चेहरा तो होगा,
पर वो आइना ना होगा,
जिसमें तुझे सँवारते देखा करता था,
भीगे पलको में बेसुध कुछ ख़्वाब तो होंगे,
पर वो चुभेंगे और दर्द भी देंगे,
कई और होंठ होंगे,
पर उन होंठो में!
बहती हंसी की रस - धार ना होगी,
साथ कई होंगे,
फिर भी मन एकांत सा होगा,
बरसाते भी होगी,
पर भिंगे मिट्टी की खुशबू!
कितने बेस्वाद होंगे,
कल्पनाए तो होगी,
पर उनके पर कटे होंगे,
उड़ान तो होगा,
पर उसमें हौंसला ना होगा।
कवी - उत्तम कुमार
Saturday, 3 July 2021
हाल - ए - दिल
जबसे प्यार हुआ है तुमसे
हाल ए दिल कुछ ऐसा है
हम न रहे अब हमारें
खुद मे ही मशगुल रहते है
कई अरसोंसे राह तकी थी
बस प्यार का ही खुमार छाया है
मांगा था तुम्हे खुदा से, अब
बडी शिद्दत से तुम्हे पाया है
दिल बनके नादान परिंदा
चारो ओर झुमे जा रहा है
तुम्हारी सांसो मे घुलनेके
पागल सपने सजा रहा है
बनके तुम खुशबू इत्र की
रोम रोम मेहका रहे हो
भूलाके सारी दुनिया को
मेरे रुबरू अब हो रहे हो
लौट आओ जान ए बहार
आँखो मे बस तेरा इंतजार है
एकदुसरे में खोने के लिए
अब दिल ए बेकारार है
तकदिर है हमारी जो
तुम पास हमारे हो
एक तेरे प्यार के सिवा
रुह भी हमारी ना हो
कवयित्री - कावेरी डफळ
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