हम देखेंगे...
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो लोह-ए-अज़ल में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम महकूमोंके पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हकम के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा, मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ायब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर भी
उट्ठेगा अन-अल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज़ करेगी खुल्क-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
रचनाकार: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (यह नज़्म मूल रूप से 1979 में लिखी गई थी)
फिल्म: द कश्मीर फाइल्स (2022) में इस्तेमाल किए गया है
संगीतकार (Music Composer): स्वप्निल बांदोडकर
मुख्य गायक (Singers): फिल्म में यह एक समूह गीत है, जिसे पल्लवी जोशी, सलमान अली, स्वप्निल बांदोडकर, शहजाद अली, मेघना मिश्रा और अनन्या वाडकर ने मिलकर गाया है
