Monday, 24 August 2026

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
किसी भी आईने मे डियर
तक चेरा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
बड़े लोगो सो मिलने में
हमेशा फासला रखना
बड़े लोगो सो मिलने में
हमेशा फासला रखना
जहा दरिया समंदर
से मिला दरिया नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
तुम्हारा शार तो बिल्कुल
नये अंदाज़ वाला है
तुम्हारा शार तो बिल्कुल
नये अंदाज़ वाला है
हमारे शार मे भी अब
कोई हंसा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
मोहबत एक खुसबु है
हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई मे भी
तन्हा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
किसी भी आईने मे डियर
तक चेरा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
https://dc.kavyasaanj.com/2026/08/parakhna-mat-parakhne-mein-ghazal-by-basheer-badra.html

- बशीर बद्र

Monday, 20 July 2026

मार लो डंडे ... कर लो दमन ...

मार लो डंडे 
कर लो दमन 
मैं फिर फिर लड़ने को पेश हूँ हिदुस्तान कहते है मुझे 
मैं गांधी का देश हूँ !! तुम नफरत नफरत बांटोगे 
मैं प्यार ही प्यार तुम्हे दूंगा 
तुम मारने  हाथ उठाओगे 
मैं बाहों में तुम्हे भर लूंगा 
तुम आवेश की गंगा हो क्या ?
तो सुनो 
मैं शिव शम्भो के केश हूँ हिंदुस्तान  कहते हैं मुझे 
मैं गांधी का देश हूँ जिस सोच को मारने खातिर तुम 
हर एक खुपड़िया खोलोगे 
वो सोच तुम्ही को बदल देगी 
एक दिन शुक्रिया बोलोगे 
मैं कई धर्म 
कई चहरे 
कई रंग रूप 
पहचान लो मुझे 
कई भेष हूँ हिंदुस्तान कहते हैं मुझे 
मैं गांधी का देश हूँ मैं भाषा भाषा में रहता हूँ में धर्म धर्म में बहता हूँ कुछ कहते  हैं मुझे फिक्र नहीं मैं अपनी मस्ती में जीता हूँ मुझ पर एक इलज़ाम भी है 
मैं सोया सोया रहता हूं पर जब जब जागा हूँ सुन लो 
इंक़लाब मैंने लाये 
मेरे आगे कितने ज़ालिम
सब  सारे गये आये 
मैं अड़ जो गया 
हटूंगा नहीं चाहे मार लो डंडे 
उठूँगा नहीं मैं सड़क पे 
बैठी भैंस हूँ हिंदुस्तान कहते हैं मुझे 
मैं गांधी का देश हूँ मैं खुसरो की कव्वाली 
मैं तुलसी की चौपाई 
बुद्ध की मुस्कान हूँ मैं बिस्मिल्लाह की शहनाई 
मैं गिरजे का ऑर्गन हूँ जहां सब मिल जुल कर खेलते हैं मैं वो नानी घर का आँगन हूँ मैं संविधान की किताब हूँ मैं आंबेडकर का न्याय हूँ मैं नफरतो का उपाय हूँ मैं जितना पुराना हूँ हां सुनो 
उससे ज़्यादा शेष हूँ हिन्दुस्तान कहते हैं मुझे 
मैं गांधी का देश हूँ
 
https://dc.kavyasaanj.com/2026/07/maar-lo-dande-kar-lo-daman-by-swanand-kirkire.html

कवी - स्वानंद किरकिरे

Friday, 1 May 2026

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे... हम देखेंगे...

हम देखेंगे...

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो लोह-ए-अज़ल में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम महकूमोंके पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हकम के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा, मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे

बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ायब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर भी
उट्ठेगा अन-अल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज़ करेगी खुल्क-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
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रचनाकार: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (यह नज़्म मूल रूप से 1979 में लिखी गई थी)

फिल्म: द कश्मीर फाइल्स (2022) में इस्तेमाल किए गया है
संगीतकार (Music Composer): स्वप्निल बांदोडकर
मुख्य गायक (Singers): फिल्म में  यह एक समूह गीत है, जिसे पल्लवी जोशी, सलमान अली, स्वप्निल बांदोडकर, शहजाद अली, मेघना मिश्रा और अनन्या वाडकर ने मिलकर गाया है

Thursday, 30 April 2026

पड रे पाण्या, पड रे पाण्या, कर पाणी पाणी...

पड रे पाण्या, पड रे पाण्या, कर पाणी पाणी
शेत माझं लई तान्हेलं चातकावाणी.
बघ नांगरलं नांगरलं, कुळवून वज केली,
सुगरणबाई पाभरीला शेतावर नेली...

तापली धरणी, पोळले चरणी मी अनवाणी,
पड रे पाण्या, पड रे पाण्या, कर पाणी पाणी
निढळावर हात ठेवून वाट मी किती पाहू?
खिंडीतोंडी हटवाद्या नको उभा राहू!!

वरड वरड वरडिती, रानी मोरमोरिनीं
पड रे पाण्या, पड रे पाण्या, कर पाणी पाणी
पाण्या पड तू, मिरगाआधी रोहिणीचा,
पाळणा रे लागे भावाआधी बहिनिचा!!

आला वळीव खिंडीतोंडी शिवार झोडीत
जाईच्या ग झाडाखाली धनी पाभर सोडित.
पड रे पाण्या, पड रे पाण्या, भिजवि जमिनी
जेवण घेऊन शेतावरी चालली कामिनी!!!
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कवी: र. वा. दिघे
(गायक: प्रल्हाद शिंदे)