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Monday, 24 August 2026

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
किसी भी आईने मे डियर
तक चेरा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
बड़े लोगो सो मिलने में
हमेशा फासला रखना
बड़े लोगो सो मिलने में
हमेशा फासला रखना
जहा दरिया समंदर
से मिला दरिया नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
तुम्हारा शार तो बिल्कुल
नये अंदाज़ वाला है
तुम्हारा शार तो बिल्कुल
नये अंदाज़ वाला है
हमारे शार मे भी अब
कोई हंसा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
मोहबत एक खुसबु है
हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई मे भी
तन्हा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता
किसी भी आईने मे डियर
तक चेरा नही रहता
परखना मत परखना
मे कोई अपना नही रहता

https://dc.kavyasaanj.com/2026/08/parakhna-mat-parakhne-mein-ghazal-by-basheer-badra.html

- बशीर बद्र

Friday, 8 May 2020

अलामत


सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा
इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा ।

हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा ।

मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तो
ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा ।

रूठ जाना तो मुहब्बत की अलामत है मगर
क्या ख़बर थी मुझसे वो इतना ख़फ़ा हो जाएगा ।

कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िन्दगी ने कह दिया
तू नहीं मेरा, तो कोई दूसरा हो जाएगा ।

सब उसी के हैं, हवा, ख़ुश्बू, ज़मीन-ओ-आसमाँ
मैं जहाँ भी जाऊँगा, उसको पता हो जाएगा।

(अलामत = निशानी, पहचान)

 शायर - बशीर बद्र