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Friday, 1 May 2026

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे... हम देखेंगे...

हम देखेंगे...

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो लोह-ए-अज़ल में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम महकूमोंके पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हकम के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा, मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे

बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ायब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर भी
उट्ठेगा अन-अल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज़ करेगी खुल्क-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
https://dc.kavyasaanj.com/

रचनाकार: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (यह नज़्म मूल रूप से 1979 में लिखी गई थी)

फिल्म: द कश्मीर फाइल्स (2022) में इस्तेमाल किए गया है
संगीतकार (Music Composer): स्वप्निल बांदोडकर
मुख्य गायक (Singers): फिल्म में  यह एक समूह गीत है, जिसे पल्लवी जोशी, सलमान अली, स्वप्निल बांदोडकर, शहजाद अली, मेघना मिश्रा और अनन्या वाडकर ने मिलकर गाया है

Thursday, 1 January 2026

मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए

मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए
देश की तबाही का हिसाब दीजिए,

गाँव गाँव ज़ख़्मी फिजाएँ हो गई
ज़हरीली घर की हवाएँ हो गई,
महँगी शराब से दवाएँ हो गई
जाइए आवाम को जवाब दीजिए
देश की तबाही का हिसाब दीजिए,

लोग जो ग़रीब थे हक़ीर हो गए
आप तो ग़रीब से अमीर हो गए
यानि हुज़ूर बेज़मीर हो गए
ख़ुद को बेज़मीरी का ख़िताब दीजिए
देश की तबाही का हिसाब दीजिए,

जेब है आवाम की सफाई कीजिए
लूट के गरीबो की भलाई कीजिए
कुछ तो निगाहों को हिजाब दीजिए
देश की तबाही का हिसाब दीजिए,

कैसी कैसी देखो योजनायें खा गए
बेच कर ये अपनी आत्माएँ खा गए
मार के मरीज़ों की दवाएँ खा गए
इन्हें पद्मश्री का ख़िताब दीजिए
देश की तबाही का हिसाब दीजिए..!!
https://dc.kavyasaanj.com/

- मंज़र भोपाली

Thursday, 27 February 2025

लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी

लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी
जाहलो खरेच धन्य ऐकतो मराठी
धर्म, पंथ, जात एक जाणतो मराठी
एवढ्या जगात माय मानतो मराठी

आमुच्या मनामनात दंगते मराठी
आमुच्या रगारगात रंगते मराठी
आमुच्या उराउरात स्पंदते मराठी
आमुच्या नसानसात नाचते मराठी

आमुच्या पिलापिलात जन्मते मराठी
आमुच्या लहानग्यात रांगते मराठी
आमुच्या मुलामुलीत खेळते मराठी
आमुच्या घराघरात वाढते मराठी

आमुच्या कुलाकुलात नांदते मराठी
येथल्या फुलाफुलात हासते मराठी
येथल्या दिशादिशात दाटते मराठी
येथल्या नगानगात गर्जते मराठी

येथल्या दरीदरीत हिंडते मराठी
येथल्या वनावनात गुंजते मराठी
येथल्या तरूलतात साजते मराठी
येथल्या कळीकळीत लाजते मराठी

येथल्या नभामधून वर्षते मराठी
येथल्या पिकांमधून डोलते मराठी
येथल्या नद्यांमधून वाहते मराठी
येथल्या चराचरांत राहते मराठी
https://dc.kavyasaanj.com/2025/02/marathi-bhasha-din-poem-labhale-aamhas-bhagya-bolto-marathi-by-suresh-bhat.html
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गीतकार - सुरेश भट