Friday, 15 October 2021

दारा बांधता तोरण

दारा बांधता तोरण घर नाचले नाचले
आज येणार अंगणी सोनचाफ्याची पाऊले

भिंती रंगल्या स्वप्नांनी झाल्या गजांच्या कर्दळी
दार नटून उभेच, नाही मिटायाची बोली

सूर्यकिरण म्हणाले घालु दारात रांगोळी
शिंपू पायांवरी दंव म्हणे वरून पागोळी

भरू ओंजळ फुलांनी बाग म्हणे बहरून
देईन मी आशीर्वाद केळ म्हणाली हासून

येरझारा घाली वारा गंध मोतिया घेउनी
सोनचाफ्याची पाऊले आज येतील अंगणी
https://dc.kavyasaanj.com/2021/10/dara-bandhata-toran.html


कवयित्री - इंदिरा संत 





Thursday, 26 August 2021

घननीळ सागराचा घननाद

घननीळ सागराचा घननाद येतो कानी
घुमती दिशा दिशात लहरीमधील गाणी…

चौफेर सूर्य ज्वाला वारा अबोल शांत
कोठे समुद्र पक्षी गगनी फिरे निवांत…

आकाश तेज भारे माडांवरी स्थिरावे
भटकी चुकार होडी लाटात संथ धावे…

वाळूत स्तब्ध झाला रेखाकृती किनारा
जवळी असून पाणी अतृप्त तो बिचारा…

जलधीबरोबरीचे आभासमान नाते
त्याची न त्यास धरती संकेत फक्त खोटे…

सांनिध्य सागराचे आकाश पांघराया
परी साथ ना कोणाची अस्तित्व सावराया…

https://dc.kavyasaanj.com/2021/08/ghanneel-sagracha-ghananaad.html

कवी - विद्याधर सीताराम करंदीकर





Saturday, 21 August 2021

पवित्र रक्षा-बंधन

कच्चे धागे में बंधा,
भाई-बहन का अटूट प्यार,
विश्व को हमारी सांस्कृतिक
परंपरा का अमूल्य उपहार--
रक्षा-बंधन धागों का त्यौहार !

परमेश्वर से प्रेम, उपदेशक से प्रेम,
माता-पिता से प्रेम, बच्चों से प्रेम,
देश-प्रेम, कला-प्रेम सभी सुना--
भाई-बहन के प्रेम के बखान में,
कवि क्यों रहा अनमना ?

धन्य हमारे पूर्वज,
इसके महत्व को समझा,
इस त्यौहार को चुना।
आवश्यक नहीं कि
वह सगा हो अपना,
जिसने कलाई पर बंधवाई,
वह स्वत: भाई बना।
भाई देता रक्षा का वचन,
बहन करती मंगल-कामना।

https://dc.kavyasaanj.com/2021/08/rakshabandhan-hindi-poem.html

कवी -- गोपाल सिन्हा





Thursday, 12 August 2021

नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ

नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद

रस्ते में चलूंगा न डर-डर के
चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के
मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम
दाहिने-बाए, दाहिने-बाए, थम
नन्हा मुन्ना राही ...

धूप में पसीना मैं बहाऊंगा जहाँ
हरे-हरे खेत लहरायेंगे वहाँ
धरती पे फ़ाके न पायेंगे जनम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम

नया है ज़माना मेरी नई है डगर
देश को बनाउंगा मशीनों का नगर
भारत किसी से रहेगा नहीं कम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम

बड़ा हो के देश का सहारा बनूंगा
दुनिया की आँखों का तारा बनूंगा
रखूँगा ऊँचा तिरंगा परचम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम

शांति की नगरी है मेरा ये वतन
सबको सिखाऊंगा मैं प्यार का चलन
दुनिया में गिरने न दूंगा कहीं बम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम


https://dc.kavyasaanj.com/2021/08/nanha-munna-rahi-hu-patriotic-song.html

गीतकार : शकिल बदायुनी